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Yogiraj Shrikrishn


जिस प्रकार श्रीकृष्ण नवीन साम्राज्य-निर्माता तथा स्वराज्यस्रष्टा युगपुरुष के रूप में प्रतिष्ठित हुए, उसी प्रकार अध्यात्म तथा तत्व-चिंतन के क्षेत्र में भी उनकी प्रवृतियाँ चरमोत्कर्ष पर पहुंच चुकी थीं। सुख-दुःख को समान समझने वाले, लाभ और हानि, जय और पराजय, जैसे द्वंदों को एक-सा मानने वाले, अनुद्विग्न, वीतराग तथा जल में रहने वाले कमलपत्र के समान सर्वथा निर्लेप, स्थितप्रज्ञ व्यक्ति को यदि हम साकार रूप में देखना चाहें तो वह कृष्ण से भिन्न अन्य कौन-सा होगा?
महाभारत पर आधारित श्रीकृष्ण के महान् लोकहित विधायक जीवन का भव्य चित्रण लालाजी की समर्थ लेखनी से निकला है। पुराणोंवत श्रीकृष्ण चरित की विकृतियों को पृथक् रखकर द्वापर के उस युग विधायक तथा महाभारत के सूत्रधार श्रीकृष्ण कि यह जीवन झांकी आज की परिस्थितियों में भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी पहले रही है।

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यागिराज श्रीकृष्ण (जीवन चरित)

Weight .250 kg
Dimensions 8.7 × 5.51 × 1.57 in

Author : Lala Lajpat Rai
Editor : Dr. Bhawanilal Bhartiya
Publisher : Govindram Hasanand
Language : Hindi
ISBN : 9788170770800
Binding : (PB)
Edition : 2016
Pages : 224

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