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Upanishad Prakash


उपनिषदों पर अनेक विद्वानों ने भाष्य टीका-टिप्पणियाँ लिखी हैं, हम उन सभी विद्वानों का सम्मान करते हुए, स्वामी दर्षनानन्द जी के भाष्य को सर्वोत्तम मानते हैं। यद्यपि स्वामी दर्षनानन्द जी ने इन उपनिषदों का भाष्य उर्दू भाषा में किया था परन्तु बाद में वेद-दर्षन, उपनिषदादि के महान् मर्मज्ञ, अनेक भाषाओं के विद्वान् स्वामी वेदानन्द (दयानन्दतीर्थ) ने इसका हिन्दी भाषान्तर, स्थान-स्थान पर अनेक उपयोगी टिप्पणियाँ तथा उपनिशत्सार लिखकर सोने पर सुहागा लोकोक्ति को चरितार्थ कर दिया।
उपनिषदों के ज्ञान ने सिद्ध कर दिया है कि मनुष्य की आत्मिक, मानसिक और सामाजिक आवष्यकताएँ किस प्रकार पूर्ण हो सकती हैं। उपनिषदों में प्रतिपादित ज्ञान केवल एक बार सुनने से ही हृदय में नहीं बैठता। बार-बार श्रवण और बार-बार मनन करने से उसका रहस्य खुलता है। यहाँ प्रथम छः उपनिषदों का भाष्य प्रस्तुत है। निःसन्देह उपनिषदों के रहस्य इतने स्पष्ट किसी भी टीका में नहीं समझाये गये।

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उपनिषद् प्रकाश

Weight .480 kg
Dimensions 8.7 × 5.51 × 1.57 in

AUTHOR : Swami Darshnanand Saraswati
PUBLISHER : Govindram Hasanand
LANGUAGE : Hindi
ISBN : 9788170772637
BINDING : (PB)
EDITION : 2018
PAGES : 464
SIZE : 21cms x 13cms
WEIGHT : 480 gm

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