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sambhvnaon ki aahat


Sambhvnaon Ki Aahat – संभावनाओं की आहट
मनुष्य साधारणतः आदत में जीता है और आदत को तोड़ना कठिनाई मालूम पड़ती है। हमारी भी सब आदतें हैं, जो ध्यान में बाधा बनती हैं।
ध्यान में और कोई बाधा नहीं है, सिर्फ हमारी आदतों के अतिरिक्त।

अगर हम अपनी आदतों को समझ लें और उनसे मुक्त होने का थोड़ा सा भी प्रयास करें तो ध्यान में ऐसे गति हो जाती है, इतनी सरलता से जैसे झरने के ऊपर से कोई पत्थर हटा ले और झरना बह जाए। जैसे कोई पत्थर को टकरा दे और आग जल जाए। इतनी ही सरलता से ध्यान में प्रवेश हो जाता है। लेकिन हमारी आदतें प्रतिकूल हैं। …

हमारी एक आदत है सदा कुछ न कुछ करते रहने की। ध्यान में इससे खतरनाक और विपरीत कोई आदत नहीं हो सकती है।

ध्यान है न-करना। ध्यान है नॉन-डूइंग। ध्यान है कुछ भी न करना।

Rs.360.00

विषय सूची
प्रवचन 1: विरामहीन अंतर्यात्रा
प्रवचन 2: चैतन्य का द्वार
प्रवचन 3: विपरीत ध्रुवों का समन्वय संगीत
प्रवचन 4: अपना-अपना अंधेरा
प्रवचन 5: धारणाओं की आग
प्रवचन 6: अंधे मन का ज्वर
प्रवचन 7: संकल्पों के बाहर

Weight .350 kg
Dimensions 8.66 × 7.25 × 1.57 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172612702
PAGES: 180
COVER: HB
WEIGHT :350 GM

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