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PHIR AMRIT KI BUND PARI


देश तो होते ही नहीं। देश तो झूठ हैं। राष्ट्र तो मनुष्य की ईजाद हैं। असलियत है व्यक्ति की। इस देश ने गौतम बुद्ध, उपनिषद के ऋषि, महावीर, आदिनाथ–आकाश की ऊंचाई से ऊंचाई छुई है। वह भी एक भारत है। वही पूरा भारत होना चाहिए। और एक भारत और भी है। राजनीतिज्ञों का, चोरों का, कालाबाजारियों का। भारत के भीतर भारत है।
इसलिए यह सवाल नहीं है कि कौन देश श्रेष्ठ है और कौन देश अश्रेष्ठ है? सवाल यह है कि किस देश में अधिकतम श्रेष्ठ लोगों का निवास है और किस दिश में अधिकतम निकृष्ट लोगों का निवास है। भारत में दोनों मौजूद हैं।

ओशो

Rs.220.00

अनुक्रम

1. ध्यान प्रक्रिया है रूपांतरण की

2. एक नया ध्रुवतारा

3. मेरी दृष्टि सृजनात्मक है

4. मैं तुम्हें इक्कीसवीं सदी में ले जा सकता हूं

5. भारत: एक सनातन यात्रा

Weight .220 kg
Dimensions 8.66 × 5.57 × 1.57 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172612528
PAGES: 110
COVER: PB
WEIGHT :220 GM

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