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ES DHAMMO SANANTANO VOL 12


धम्मपद: बुद्ध-वाणी

जागो और जीओ
धम्मपद के तो अंतिम सूत्र का दिन आ गया, लेकिन इस सत्संग को भूल मत जाना। इसे सम्हाल कर रखना। यह परम संपदा है। इसी संपदा में तुम्हारा सौभाग्य छिपा है। इसी संपदा में तुम्हारा भविष्य है। फिर-फिर इन गाथाओं को सोचना। फिर-फिर इन गाथाओं को गुनगुनाना। फिर-फिर इन अपूर्व दृश्यों को स्मरण में लाना। ताकि बार-बार के आघात से तुम्हारे भीतर सुनिश्चित रेखाएं हो जाएं। पत्थर पर भी रस्सी आती-जाती रहती है, तो निशान पड़ जाते हैं। ओशो

Rs.760.00

113: संन्यास की मंगल-वेला
114: जीने की कला
115: विराट की अभीप्सा
116: राजनीति और धर्म
117: बुद्धत्व का आलोक
118: समग्र संस्कृति का सृजन
119: ब्राह्मणत्व के शिखर–बुद्ध
120: अप्प दीपो भव!
121: जागो और जीओ
122: एस धम्मो सनंतनो!

Weight .590 kg
Dimensions 8.66 × 5.57 × 1.57 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172613549
PAGES: 326
COVER: HB
WEIGHT :590 GM

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