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ES DHAMMO SANANTANO, VOL. 11


धम्मपद: बुद्ध-वाणी

बुद्धत्व का कमल बुद्ध को मरे पच्चीस सौ साल हो गए, लेकिन जिनको भी थोड़ी सी समझ है, उन्हें आज भी उनकी सुगंध मिल जाती है। जिन्हें समझ नहीं थी, उन्हें तो उनके साथ मौजूद होकर भी नहीं मिली। जिनमें थोड़ी संवेदनशीलता है, पच्चीस सौ साल ऐसे खो जाते हैं कि पता नहीं चलता; फिर बुद्ध जीवंत हो जाते हैं। फिर तुम्हारे नासापुट उनकी गंध से भर जाते हैं। फिर तुम उनके साथ आनंदमग्न हो सकते हो। समय का अंतराल अंतराल नहीं होता; न बाधा बनती है। सिर्फ संवेदनशीलता चाहिए। ओशो

Rs.760.00

Chapter Titles

42: झुकने से उपलब्धि, झुकने में उपलब्धि
43: परमात्मा अपनी ओर आने का ही ढंग
44: ऊर्जा का क्षण-क्षण उपयोग: धर्म
45: सुख या दुख तुम्हारा ही निर्णय
46: जीवन-मृत्यु से पार है अमृत
47: अकेलेपन की गहन प्रतीति है मुक्ति
48: आज बनकर जी!
49: महोत्सव से परमात्मा, महोत्सव में परमात्मा
50: अशांति की समझ ही शांति
51: आत्म-स्वीकार से तत्क्षण क्रांति

Weight .600 kg
Dimensions 8.66 × 7.25 × 1.57 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172613532
PAGES: 344
COVER: HB
WEIGHT :600 GM

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