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ES DHAMMO SANANTANO, VOL. 10


धम्मपद: बुद्ध-वाणी

लोभ संसार है, गुरु से दूरी है
जिसके मन में आज भी बुद्ध के प्रति अपार श्रद्धा है, उसके लिए बुद्ध आज उतने ही प्रत्यक्ष हैं जैसे तब थे। कोई फर्क नहीं पड़ा है। श्रद्धा की आंख हो तो समय और स्थान की सारी दूरियां गिर जाती हैं। आज हमसे बुद्ध की दूरी पच्चीस सौ साल की हो गई, यह समय की दूरी है। लेकिन प्रेम के लिए और ध्यान के लिए न कोई स्थान की दूरी है, न कोई समय की दूरी है। ध्यान और प्रेम की दशा में समय और स्थान दोनों तिरोहित हो जाते हैं। तब हम जीते हैं शाश्वत में, तब हम जीते हैं अनंत में। तब हम जीते हैं उसमें, जो कभी नहीं बदलता; जो सदा है, सदा था, सदा रहेगा। एस धम्मो सनंतनो! उसको जान लेना ही शाश्वत सनातन धर्म को जान लेना है। ओशो

Rs.760.00

Chapter Titles

42: झुकने से उपलब्धि, झुकने में उपलब्धि
43: परमात्मा अपनी ओर आने का ही ढंग
44: ऊर्जा का क्षण-क्षण उपयोग: धर्म
45: सुख या दुख तुम्हारा ही निर्णय
46: जीवन-मृत्यु से पार है अमृत
47: अकेलेपन की गहन प्रतीति है मुक्ति
48: आज बनकर जी!
49: महोत्सव से परमात्मा, महोत्सव में परमात्मा
50: अशांति की समझ ही शांति
51: आत्म-स्वीकार से तत्क्षण क्रांति

Weight .630 kg
Dimensions 8.66 × 7.25 × 2 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172613525
PAGES: 340
COVER: HB
WEIGHT :630 GM

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