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ES DHAMMO SANANTANO, VOL. 08


धम्मपद: बुद्ध-वाणी

जगत का अपरतम संबंध: गुरु-शिष्य के बीच
किसी गायक को गीत गाते देख कर तुम्हें याद आ जाती है अपने कंठ की कि कंठ तो मेरे पास भी है। और किसी नर्तक को नाचते देख कर तुम्हें याद आ जाती है अपने पैरों की कि पैर तो मेरे पास भी हैं, चाहूं तो नाच तो मैं भी सकता हूं। किसी चित्रकार को चित्र बनाते देख कर तुम्हें भी याद आ जाती है कि चाहूं तो चित्र मैं भी बना सकता हूं। ऐसे ही किसी बुद्ध को देख कर तुम्हें याद आ जाती है कि चाहूं तो बुद्धत्व मैं भी पा सकता हूं। ओशो

Rs.760.00

Chapter Titles

71: उठने में ही मनुष्यता की शुरुआत है
72: आत्मबोध ही एकमात्र स्वास्थ्य
73: आदमी अकेला है
74: जगत का अपरतम संबंध: गुरु-शिष्य के बीच
75: तुम तुम हो
76: धर्म अनुभव है
77: जितनी कामना, उतनी मृत्यु
78: तृष्णा का स्वभाव अतृप्ति है
79: सत्य सहज आविर्भाव है
80: शब्दों की सीमा, आंसू असीम
81: ध्यान की खेती संतोष की भूमि में

Weight .600 kg
Dimensions 8.66 × 7.68 × 1.57 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172613501
PAGES: 356
COVER: HB
WEIGHT :600 GM

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