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ES DHAMMO SANANTANO, VOL. 06


धम्मपद: बुद्ध-वाणी

साक्षीभाव: परम सूत्र
मैं तुम्हें अपने पर नहीं रोकना चाहता। मैं तुम्हारे लिए द्वार बनूं, दीवार न बनूं। तुम मुझसे प्रवेश करो, मुझ पर रुको मत। तुम मुझसे छलांग लो, तुम उड़ो आकाश में। मैं तुम्हें पंख देना चाहता हूं, तुम्हें बांध नहीं लेना चाहता। इसीलिए तुम्हें सारे बुद्धों का आकाश देता हूं। मैं तुम्हारे सारे बंधन तोड़ रहा हूं। इसलिए मेरे साथ तो अगर बहुत हिम्मत हो तो ही चल पाओगे। अगर कमजोर हो, तो किसी कारागृह को पकड़ो, मेरे पास मत आओ।
वस्तुतः मैं तुम्हें कहीं ले जाना नहीं चाहता, उड़ना सिखाना चाहता हूं। ले जाने की बात ही ओछी है। मैं तुमसे कहता हूं, तुम पहुंचे हुए हो। जरा परों को तौलो, जरा तूफानों में उठो, जरा आंधियों के साथ खेलो, जरा खुले आकाश का आनंद लो। मैं तुमसे यह नहीं कहता कि सिद्धि कहीं भविष्य में है। अगर तुम उड़ सको तो अभी है, यहीं है। ओशो

Rs.760.00

Chapter Titles

52: सूरज ढलने से पहले दीये को सम्हाल लेना!
53: साक्षीभाव: परम सूत्र
54: समष्टि से आलिंगन है धर्म
55: मुझे शास्त्र नहीं, अनुभव बनाओ
56: अत्ताहि अत्तनो नाथो
57: ‘न-होना’ है जीवन
58: स्व से होकर राह सर्व को
59: गुरु को द्वार बनाना, दीवार नहीं
60: जीवित धर्म का उद्गम केंद्र: सदगुरु

Weight .550 kg
Dimensions 8.66 × 7.25 × 1.57 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172613822
PAGES: 270
COVER: HB
WEIGHT :550 GM

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