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ES DHAMMO SANANTANO, VOL. 03


धम्मपद: बुद्ध-वाणी

मौन में खिले मुखरता
भारत में एक अनूठी परंपरा रही है कि जब फिर कोई बुद्धपुरुष हो तो अतीत के बुद्धपुरुषों की वाणी को पुनरुज्जीवित करे। तुम्हारे हस्ताक्षर हटाए; तुमने जो धूल-धवांस इकट्ठी कर दी है चारों तरफ, उसे हटाए; दर्पण को फिर निखराए, फिर उघाड़े। थोड़ी ही देर के लिए धर्म शुद्ध रहता है, बड़ी थोड़ी देर के लिए! तुम्हारे सुनते ही उपद्रव शुरू हो गया। तुम संगठन करोगे। तुम संप्रदाय बनाओगे, तुम शास्त्र निर्मित करोगे। वे शास्त्र, वे संप्रदाय, वे सिद्धांत, वे धर्म तुम्हारे होंगे–बुद्धपुरुषों के नहीं। बुद्धपुरुषों का तो बहाना होगा। धीरे-धीरे उनका बहाना भी हट जाएगा। लकीरें रह जाएंगी–मुर्दा। ओशो

Rs.760.00

Chapter Titles

21: बाल-लक्षण
22: बुद्धि, बुद्धिवाद और बुद्ध
23: सत्संग-सौरभ
24: लुत्फ-ए-मय तुझसे क्या कहूं!
25: पुण्यातीत ले जाए, वही साधु-कर्म
26: मौन में खिले मुखरता
27: लाभ-पथ नहीं, निर्वाण-पथ
28: जागरण और आत्मक्रांति
29: कल्याण मित्र की खोज
30: मंथन कर, मंथन कर

Weight .550 kg
Dimensions 8.66 × 5.57 × 1.57 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172613792
PAGES: 266
COVER: HB
WEIGHT :550 GM

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