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ASHTAVAKRA MAHAGITA, VOL.6


युग बीते पर सत्य न बीता, सब हारा पर सत्य न हारा

धर्म अर्थात सन्नाटे की साधना
ये जो अष्टावक्र के सूत्र हैं, इन्हें तुम ऐसा मत समझ लेना कि कुछ थोड़ी जानकारी बढ़ गई, समाप्त हुई बात। नहीं, इससे तुम्हारा जीवन बढ़े, जानकारी नहीं, तुम्हारा अस्तित्व बढ़े, तो ही समझना कि तुमने सुना। तुम्हारा अस्तित्व फैले। तुम विराट हो, तुम्हें उसकी याद आए। यह सारा आकाश तुम्हारा है: तुम्हें उसकी स्मृति आए। तुम सम्राट हो। उसका बोधमात्र–और सारा भिखमंगापन सदा के लिए समाप्त हो जाता है। ओशो

Rs.800.00

Chapter Titles

1: शून्य की वीणा: विराट के स्वर
2: तू स्वयं मंदिर है
3: धर्म अर्थात सन्नाटे की साधना
4: साक्षी, ताओ और तथाता
5: परमात्मा तुम्हारा स्वभावसिद्ध अधिकार है
6: आलसी शिरोमणि हो रहो
7: तथाता का सूत्र–सेतु है
8: संन्यास–सहज होने की प्रक्रिया
9: साक्षी स्वाद है संन्यास का
10: प्रभु-मंदिर यह देह री

Weight .520 kg
Dimensions 8.66 × 5.57 × 1.57 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172613730
PAGES: 312
COVER: HB
WEIGHT :520 GM

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