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ASHTAVAKRA MAHAGITA, VOL.3


युग बीते पर सत्य न बीता, सब हारा पर सत्य न हारा

स्वतंत्रता की झील: मर्यादा के कमल
महागीता का मौलिक संदेश एक है कि चुनाव संसार है। अगर तुमने संन्यास भी चुना, तो वह भी संसार हो गया। जो तुमने चुना, वह परमात्मा का नहीं है; जो अपने से घटे, वही परमात्मा का है। जो तुमने घटाना चाहा, वह तुम्हारी योजना है; वह तुम्हारे अहंकार का विस्तार है। तो महागीता कहती है: तुम चुनो मत–तुम सिर्फ साक्षी बनो। जो हो, होने दो। बाजार हो तो बाजार; अचानक तुम पाओ कि चल पड़े जंगल की तरफ, चल पड़े–नहीं चुनाव के कारण; सहज स्फुरणा से–तो चले जाओ। सहज स्फुरणा से चले जाना जंगल एक बात है; चेष्टा करके, निर्णय करके, साधना करके, अभ्यास करके जंगल चला जाना बिलकुल दूसरी बात है। महागीता कहती है: चुनो मत! क्योंकि चुनोगे तो अहंकार से ही चुनोगे न? चुनोगे तो ‘मैं’ करने वाला हूं–कर्ता हो जाओगे न! महागीता कहती है: न कर्ता, न भोक्ता–तुम साक्षी रहो। ओशो

Rs.800.00

Chapter Titles

1: ज्ञान मुक्ति है
2: एकटि नमस्कारे प्रभु, एकटि नमस्कारे!
3: दृष्टि ही सृष्टि है
4: कितनी लघु अंजलि हमारी
5: दृश्य स्वप्न है, द्रष्टा सत्य है
6: स्वतंत्रता की झील: मर्यादा के कमल
7: वासना संसार है, बोध मुक्ति है
8: बोध से जीओ–सिद्धांत से नहीं
9: ध्यान अर्थात उपराम
10: संन्यास बांसुरी है साक्षीभाव की

Weight .760 kg
Dimensions 8.66 × 7.25 × 2 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172613709
PAGES: 308
COVER: HB
WEIGHT :760 GM

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