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ASHTAVAKRA MAHAGITA, VOL.1


अष्टावक्र कोई दार्शनिक नहीं हैं, और अष्टावक्र कोई विचारक नहीं हैं। अष्टावक्र तो एक संदेशवाहक हैं–चैतन्य के, साक्षी के। शुद्ध साक्षी! सिर्फ देखो! दुख हो दुख को देखो, सुख हो सुख को देखो! दुख के साथ यह मत कहो कि मैं दुख हो गया; सुख के साथ यह मत कहो कि मैं सुख हो गया। दोनों को आने दो, जाने दो। रात आए तो रात देखो, दिन आए तो दिन देखो। रात में मत कहो कि मैं रात हो गया। दिन में मत कहो कि मैं दिन हो गया। रहो अलग-थलग, पार, अतीत, ऊपर, दूर! एक ही बात के साथ तादात्म्य रहे कि मैं द्रष्टा हूं, साक्षी हूं। ओशो

Rs.800.00

अनुक्रम

1: सत्य का शुद्धतम वक्तव्य
2: समाधि का सूत्र: विश्राम
3: जैसी मति वैसी गति
4: कर्म, विचार, भाव–और साक्षी
5: साधना नहीं–निष्ठा, श्रद्धा
6: जागो और भोगो
7: जागरण महामंत्र है
8: नियंता नहीं–साक्षी बनो
9: मेरा मुझको नमस्कार
10: हरि ॐ तत्सत्‌

Weight .520 kg
Dimensions 8.66 × 7.25 × 1.57 in

AUTHOR: OSHO
PUBLISHER: Osho Media International
LANGUAGE: Hindi
ISBN: 9788172613686
PAGES: 136
COVER: HB
WEIGHT :520 GM

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