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बाल्मीकि रामायण- Valmiki Ramayana


स्वामी जगदीष्वरानन्द सरस्वती आर्य जगत् के सुप्रसिद्ध विद्वान्, निरन्तर साहित्य साधना में संलग्न, रामायण के समालोचक एवं मर्मज्ञ लेखक थे।

इस पुस्तक द्वारा आप अपने प्राचीन गौरवमय इतिहास की झांकी, मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन का अध्ययन, प्राचीन राज्यव्यवस्था का स्वरुप देख सकते हैं।

यदि आप भ्रातृ-प्रेम नारी-गौरव आदर्ष सेवक, आदर्ष मित्र, आदर्ष राज्य, आदर्ष पुत्र के स्वरुपों का अवलोकन या आप रामायण का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहते हैं तो यह रामायण अवष्य पढ़ें।

यह ग्रन्थ सैकड़ों टिप्पणियों से समलंकृत सम्पूर्ण रामायण 7000 श्लोकों में पूर्ण हुआ है।

Rs.450.00

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#1 in Govindram Hasanand Prakashan (See Top 100 in Govindram Hasanand Prakashan)
#3 in रामायण/रामकथा (See Top 100 in रामायण/रामकथा)

commentary by Swami Jagdishwaranand. After reading this edition you will emerge with greater courage, stronger will and purer mind. It contains selected shalokas out of the thousands of them which the author analyzed to be of Maharshi Valmiki. You will find the appeal and freshness of this epic poem transcend all limitation imposed by time, space, age, caste, creed, society and language.

Weight 1.240 kg
Dimensions 9.8 × 7.8 × 1.57 in

AUTHOR : Swami Jagdishwaranand Saraswati
PUBLISHER : Govindram Hasanand
LANGUAGE : Hindi
ISBN : 9788170770145
BINDING : Hardback
EDITION : 2021
PAGES : 588
SIZE : 25cms x 19cms
WEIGHT : 1240 gm

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